नीम करौली बाबा की संपूर्ण जीवन कथा
📅 December 03, 2025
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परिचय
- नीम करौली बाबा, जिन्हें महाराज जी के नाम से भी जाना जाता है, भारत के महान संतों में से एक थे। उनका जीवन सरल, प्रेममय और चमत्कारों से भरा हुआ था। दुनिया भर में लाखों भक्त उन्हें भगवान हनुमान का स्वरूप मानते हैं। Apple के संस्थापक Steve Jobs, Facebook के Mark Zuckerberg, और लाखों विदेशी भी उनसे गहराई से प्रभावित हैं।
- स्वयं बाबा कभी भी अपनी जन्म तिथि नहीं बताते थे
भक्त:
- स्टीव जॉब्स
- मार्क ज़ुकरबर्ग
- जूलिया रॉबर्ट्स
- राम दास (Richard Alpert)
प्रारंभिक जीवन 🌺
- नीम करौली बाबा (श्री लक्ष्मण दास महाराज जी) के बारे में जन्म-तिथि और उम्र को लेकर कोई एक “100% प्रमाणित” रिकॉर्ड नहीं है। उनकी जीवनी ज़्यादातर शिष्यों, परंपरा और अनुभवों पर आधारित है।
- नीम करौली बाबा का जन्म लगभग 1900 के आसपास उत्तर प्रदेश के गांव अकबरपुर में हुआ। उनका वास्तविक नाम लक्ष्मण दास शर्मा था। बचपन से ही उनमें अद्भुत आध्यात्मिक शक्ति दिखाई देती थी।
- 1911 में श्री लक्ष्मण दास महाराज जी अपना घर छोड़कर चले गए और उनका कोई अता-पता नहीं चला। क्या हुआ पूरा परिवार परेशान था सारे रिश्तेदार, जो भी थे ससुर तक परेशान थे लेकिन कई किसी को पता नहीं चला ।
- क्योंकि जो व्यक्ति जिस लाइन का होता है उसमें ज्यादा पड़ता है और उसी लाइन की तरफ बढ़ता है कि आध्यात्मिक क्षेत्र में उनका लगाओ ज्यादा था गुजरात के राजकोट जगह पर राजकोट में एक आश्रम में आप सेवाएं देते हैं और बहुत अच्छी तरह से उनकी तपस्या खत्म हो जाती है कि जब अब साधारण ग्रस्त व्यक्ति संन्यास में बदल जाता है ग्रस्त में उनका नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा है उनकी योग्यता को देखते हुए, उत्तराधिकारी घोषित कर दिया गया लेकिन कुछ समय बाद महाराज जी ने महंत जी से आज्ञा मांगी और वह स्थल छोड़ दिया। अब आप राजकोट से आते हैं बनियां गांव है एक गुजरात में ही हैं वहां पर हनुमान जी का मंदिर स्थापित करते हैं
संन्यास ग्रहण (🕉️ )
- राजकोट के हनुमान जी का मंदिर के पास तालाब है और वह एक कठिन तपस्या का निर्णय लेते हैं कि वह तालाब में घंटों खड़े होकर तपस्या करते हैं श्री लक्ष्मण दास महाराज जी तालाब में घुसते हैं और घंटों वहां पर अपना जप तप करते रहते थे। और इसके साथ ही होता क्या है कि वहां पर जो बस चलाने वाले होते हैं और लोग होते हैं वह आते हैं और वहां उनसे वार्ता भी करते हैं कि खाने-पीने की चीजें भी मांग लेते हैं तो श्री लक्ष्मण दास महाराज जी, से लोग कभी-कभी तो ऐसी मांग कर देते हैं कि आप पानी में खड़े आपके पास तो है नहीं कुछ लेकिन किसी ने कहा कि बाबा जी हमको जलेबियां खानी है तो उन्हें ऐसे हाथ घुमाया पीछे लिया पैकेट दिया तो यह चर्चाएं धीमे-धीमे जब होने लगी तो वह लोग एकत्रित होने लगे आप मान्यता बढ़ने लगी आ अध्यात्मिक क्षेत्र में प्रभाव पड़ता है कि आप में 1911 में गृह त्याग करके गए थे और 1917 तक आप भगवनिया में रहते हैं पूजा जप तप सब चलता है और फिर वहां लोग आपको तलैया बाबा के नाम से पुकारने लगते हैं
- अभी बाबा नीमकरोरी नहीं बने थे। महाराज जी ने एक दिन उन्होंने गाँव वालों से कहा “मैं गंगा मैया से मिलने जा रहा हूँ” लोगों ने इसे सामान्य बात समझा — पर उनके शब्दों में भाव अलग था। वे नदी को जल नहीं, माँ के रूप में देखते थे। जब वे गंगा घाट (आज का पांचाल घाट) पहुँचे, तो:वे सीधे घाट पर बैठ गए आँखें बंद कीं ध्यान में लीन हो गए भक्तों के अनुसार:उस समय उन्होंने कहा “माँ आ गई” लोगों ने देखा गंगा का जल अचानक शांत हो गया एक अलौकिक शीतलता और कंपन फैल गया महाराज जी ने गंगा को माँ कहकर प्रणाम किया और कहा: “अब चलो” श्री लक्ष्मण दास महाराज जी साधारण वस्त्र हाथ में कुछ नहीं मौन और वैराग्य में लीन वे एक रेलगाड़ी में बिना टिकट चुपचाप बैठ गए। कोई पहचान नहीं, कोई दिखावा नहीं। ट्रेन में टिकट चेकर आया। उसने महाराज जी से पूछा: “टिकट दिखाओ” महाराज जी मुस्कुराए, कुछ नहीं बोले। टीटी ने समझा: “ये बिना टिकट है” और उन्हें जबरदस्ती ट्रेन से उतार दिया। स्टेशन के पास जंगल और नीम के पेड़ थे महाराज जी वहीं नीम के नीचे शांति से बैठ गए। कुछ देर बाद ट्रेन को हरी झंडी मिली, लेकिन—ट्रेन एक इंच भी नहीं हिली सब हैरान थे।
- रेलवे विभाग के तकनीशियन और ड्राइवर की टीम गार्ड सब लग जाते हैं और ट्रेन नहीं चल पाती फुल स्टीम देते सब कुछ कर लेते हैं स्थानीय लोगों ने कहा: “जिस महाराज जी को उतारा है, वो कोई साधारण आदमी नहीं” उन्होंने बताया “वो नीम के नीचे बैठे हैं” अंग्रेज अफसरों को बुलाया गया। महाराज जी से विनती करने अफसर और लोग नीम के पेड़ के पास पहुँचे। उन्होंने महाराज जी से कहा: “गलती हो गई कृपया ट्रेन में वापस बैठ जाइए” जैसे ही महाराज जी: डिब्बे में कदम रखा ट्रेन अपने आप चल पड़ी कोई इंजन स्टार्ट नहीं, जहाँ ये घाटना हुई उस गांव का नाम "नीम करौली" था उसके बाद में महाराज जी को नीम करौली बाबा से नाम से लोग जानने लगे।
- बहुत कम उम्र में ही वह घर-परिवार छोड़कर संन्यास मार्ग पर चल पड़े। चमत्कारों की लगभग 700 कथाएँ हैं और नए चमत्कार करते रहते हैं
- कहा जाता है कि उन्होंने बहुत सारे अद्भुत चमत्कार किया और तभी लोग उन्हें नीम करौली बाबा कहने लगे।
चमत्कार (⚡)
- नीम करौली बाबा के जीवन में अनगिनत चमत्कारों का वर्णन मिलता है। कुछ प्रमुख—
- वे बिना बोले ही किसी के मन की बात जान लेते थे।
- बीमारों को ठीक कर देना।
- पैसे, भोजन और संसाधन तुरंत उपलब्ध करवा देना।
- दूर बैठकर भी भक्तों की रक्षा करना।
- उनके आश्रमों में आज भी ये दिव्य ऊर्जा महसूस की जाती है।
प्रमुख आश्रम (🕍)
- कैंची धाम (उत्तराखंड) – सबसे प्रसिद्ध आश्रम
- Vrindavan Ashram
- Lucknow Ashram
- New Mexico USA Ashram
- कैंची धाम में हर साल 15 जून को विशाल भंडारा होता है जिसमें लाखों लोग शामिल होते हैं।
विश्व में उनकी प्रसिद्धि (💡)
- Steve Jobs ने अपने जीवन के कठिन समय में भारत आकर नीम करौली बाबा के आश्रम का दौरा किया।
- बाद में उन्होंने Zuckerberg को भी यहाँ आने की सलाह दी।
- इस घटना के बाद बाबा का नाम पूरी दुनिया में फैल गया।
बाबा का उपदेश (🌼)
- नीम करौली बाबा कहते थे —
- “सबको प्रेम दो, सबकी सेवा करो, सबको क्षमा करो।”
- उनका पूरा जीवन प्रेम, सेवा और सरलता का संदेश देता है।
समाधि (🕯️)
- नीम करोली बाबा महाराज जी, 11 सितंबर, 1973 को वृंदावन (उत्तर प्रदेश) के एक अस्पताल में डायबिटिक कोमा में जाने के बाद हुई। वह आगरा से रात की ट्रेन से कैंची लौट रहे थे, जहाँ वह सीने में दर्द के कारण एक हार्ट स्पेशलिस्ट को दिखाने गए थे। वह और उनके साथ यात्रा कर रहे लोग मथुरा रेलवे स्टेशन पर उतरे,और महाराज जी ने वृंदावन में अपनी देह त्यागी।
- लेकिन आज भी भक्त मानते हैं कि महाराज जी का आशीर्वाद लगातार मिल रहा है।
अन्य :
- 2000 के दशक के आखिर में एक और फाउंडेशन बना, जिसका नाम 'लव सर्व रिमेंबर फाउंडेशन' है, जिसका मकसद नीम करोली बाबा और राम दास की शिक्षाओं को बचाना और आगे बढ़ाना है।
- अमेरिका लौटने के बाद, राम दास और लैरी ब्रिलियंट ने सेवा फाउंडेशन की स्थापना की, जो बर्कले, कैलिफ़ोर्निया में स्थित एक अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठन है, जो नीम करोली बाबा की शिक्षाओं को दुनिया से गरीबी खत्म करने के लिए समर्पित है। सेवा की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक यह है कि इसने तिब्बत, नेपाल, भारत, बांग्लादेश, कंबोडिया और पूरे मध्य और दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका जैसे देशों में मोतियाबिंद से पीड़ित 3.5 मिलियन से ज़्यादा अंधे लोगों की आँखों की रोशनी वापस लाने में मदद की है। इस संगठन का एक नेटिव अमेरिकन कम्युनिटी हेल्थ प्रोग्राम भी है जो पूरे संयुक्त राज्य अमेरिका में नेटिव समुदायों में मधुमेह की महामारी से लड़ने का काम करता है।
- अनन्य भक्तों को समर्पित करते हुए महाराज जी की कृपा सब को मिले जय श्री राम, जय हनुमान, जय नीम करोली बाबा की जी जय